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उत्तराखण्ड

निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज में करंट लगने से कर्मचारी की मौत

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कनखल /हरिद्वार- कनखल थाना क्षेत्र के अंतर्गत जगजीतपुर में बनाए जा रहे मेडिकल कॉलेज में काम करते समय हुई मजदूर की मौत के मामले से सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम की भी पोल खुली है। मजदूर की मौत के बाद उसे मुआवजे के लिए परिजन और अन्य कर्मचारियों ने 24 घंटे तक संघर्ष किया। जिसके बाद कंस्ट्रक्शन कंपनी मुआवजा देने को राजी हुई। सोमवार की देर शाम को मुआवजा मिलने के बाद परिजन शव को लेकर बिहार रवाना हुए हैं। जानकारी के अनुसार जगजीतपुर ​निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज मैं वाइब्रेटर मशीन चलाते हुए करंट लगने से शुभंकर (24 वर्ष) पुत्र चली तरसादा निवासी ग्राम राजपुर पीएस महेशी जिला सहरसा बिहार 10 से 15 फीट नीचे जा गिरा था। सिर में गंभीर चोट आई थी। जबकि करंट से भी झुलस गया था। इसके बाद साथी कर्मचारी उसे आनन-फानन में जिला अस्पताल ले गए थे। जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था। रविवार की देर शाम को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया था। जिसके बाद कर्मचारी शव को मेडिकल कॉलेज में ही लेकर एंबुलेंस से पहुंच गए थे। जहां उन्होंने एंबुलेंस को खड़ी कर हंगामा शुरू कर दिया था। कर्मचारी 12 से 15 लाख रुपए मुआवजा मृतक के परिवार को देने की मांग पर अड़ गए थे। रात भर कर्मचारी संघर्ष करते रहे। लेकिन यश्नंद इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के अधिकारी मुआवजा देने को तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि इंश्योरेंस के लिए बाद में क्लेम कर लिया जाए। लेकिन कर्मचारी रविवार की रात से लेकर सोमवार की दोपहर तक धरने पर बैठे रहे और मुआवजे की मांग पर पड़ गए। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद कंपनी और कर्मचारियों के बीच लिखित समझौता हुआ। करीब नौ लाख का मुआवजा मृतक के परिवार को दिया गया। जिसके बाद परिवार देर शाम को शव लेकर रवाना हो गया। दूसरी तरफ सवाल उठें हैं कि क्या अभी कंस्ट्रक्शन कंपनी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर ऐसे ही लापरवाह बनी रहेगी या फिर उनके काम करने के दौरान सुरक्षा के इंतजाम अपनाएगी। यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

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