Report by : CWN Desk
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देहरादून: निजी अस्पताल की लापरवाही से महिला की मौत, ऑपरेशन में पेट में छोड़ा पट्टी का टेप!

रुद्रपुर में शिक्षिका सुषमा पंत की मौत के बाद परिजनों ने शव लेने से इंकार कर दिया। 20 घंटे के इंतजार के बाद पड़ोसियों ने किया अंतिम संस्कार। जानें, पुलिस की जाँच में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे।

रुद्रपुर। एक शिक्षिका की मौत के बाद मानवीय रिश्तों और सामाजिक अलगाव का एक दुखद मामला सामने आया है। शिक्षिका सुषमा पंत की मौत के बाद पुलिस को उनके शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए लगभग 20 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इसकी वजह यह थी कि सुषमा की माँ और अन्य परिजन रुद्रपुर पहुँचने को तैयार नहीं थे। यह घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।


कोतवाली के एसएसआई नवीन बुधानी ने बताया कि बुधवार को काफी समझाने-बुझाने के बाद उनकी माँ सिर्फ पोस्टमार्टम की औपचारिकता पूरी करने के लिए बमुश्किल रुद्रपुर पहुँचीं। हालाँकि, पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद उन्होंने अपनी बेटी का शव लेने से साफ इंकार कर दिया और वापस लौट गईं। इस दुःखद स्थिति के बाद, अंततः पड़ोसियों ने ही शिक्षिका सुषमा पंत के शव का अंतिम संस्कार किया।
पुलिस ने इस संबंध में पड़ोसियों से पूछताछ की, जिससे कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पड़ोसियों ने बताया कि सुषमा पंत का अपने परिजनों से बहुत कम संपर्क था। उन्होंने कौशल्या फेस-2 में अपने पिता के नाम पर मकान खरीदा था और पहले वह अकेले रहती थीं। बाद में उनके साथ आजमगढ़ निवासी अजय मिश्रा रहने लगा। कई वर्षों तक पड़ोसियों को यही लगता रहा कि अजय मिश्रा ही सुषमा के पति हैं।
एसएसआई ने पुष्टि की कि शुरुआत में तो सुषमा की माँ पोस्टमार्टम के लिए भी आने को तैयार नहीं थीं। पुलिस और स्थानीय लोगों के अथक प्रयासों के बाद ही वे यहाँ पहुँचीं। परिजनों द्वारा शव ठुकराए जाने की यह घटना कई सवाल खड़े करती है। पुलिस अब सुषमा पंत की मौत के कारणों और उनके पारिवारिक तथा निजी संबंधों की गहराई से जाँच कर रही है। यह मामला दिखाता है कि किस तरह महानगरों और शहरों में लोग अपने पारिवारिक बंधनों से दूर हो जाते हैं।

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