हरिद्वार
हरिद्वार में राष्ट्रीय कवि संगम की गोष्ठी: शिवरात्रि पर कवियों ने शिव शिवार्चन से लूटी महफिल
हरिद्वार में राष्ट्रीय कवि संगम द्वारा आयोजित कवि गोष्ठी में रचनाकारों ने महाशिवरात्रि पर काव्य पाठ किया। रमेश रमन की अध्यक्षता में हुई गोष्ठी की पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
हरिद्वार: महाशिवरात्रि के पावन पर्व के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय कवि संगम की हरिद्वार इकाई द्वारा एक भव्य कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन नगर के वरिष्ठ कवि एवं गीतकार रमेश रमन के द्वारिका विहार स्थित आवास पर संपन्न हुआ। गोष्ठी में उपस्थित रचनाकारों ने अपनी विशिष्ट काव्य विधाओं के माध्यम से देवाधिदेव महादेव को भावपूर्ण काव्यांजलियाँ अर्पित कीं।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलन और पुष्पार्पण के साथ हुआ। अपराजिता ‘उन्मुक्त’ की वाणी वंदना ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। रमेश रमन की अध्यक्षता और प्रभात रंजन के कुशल संचालन में युवा कवियों से लेकर वरिष्ठ साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। दिव्यंश ‘दुष्यंत’ और शशि रंजन ‘समदर्शी’ के शिव भजनों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
गोष्ठी के दौरान कवियों ने न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक विषयों पर भी अपनी लेखनी चलाई। अनूप सनातन ने गौमाता के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की, वहीं अरुण कुमार पाठक ने विरह के भावों से भरी ग़ज़ल प्रस्तुत की। मेजबान रमेश रमन और अरविंद दुबे की कविताओं पर सदन ने जमकर तालियाँ बटोरीं। अपराजित ने बुजुर्गों के सम्मान और विरासत पर आधारित पंक्तियों से गहरा संदेश दिया।
इस साहित्यिक बैठक में संगठन की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण नियुक्तियां भी की गईं। राष्ट्रीय कवि संगम हरिद्वार इकाई में अपराजिता ‘उन्मुक्त’ को ‘गोष्ठी प्रमुख’ और प्रभात रंजन को ‘जिला मंत्री’ का नया दायित्व सौंपा गया। आयोजन में श्रीमती सुनीता चौधरी और विक्रम जी जैसे प्रबुद्ध श्रोताओं की उपस्थिति ने रचनाकारों का उत्साहवर्धन किया।
अंततः, यह गोष्ठी शिव भक्ति और साहित्य के अनूठे संगम के रूप में याद की जाएगी। कवियों ने स्पष्ट किया कि कविता केवल शब्द नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है। महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित इस काव्य शिवार्चन ने हरिद्वार के साहित्यिक आकाश को नई ऊंचाई प्रदान की।
