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हल्द्वानी

उत्तराखंड: पहाड़ों पर महंगा होगा राशन और सामान, माल भाड़े में 10% तक बढ़ोतरी की तैयारी

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उत्तराखंड में पेट्रोल-डीजल और स्पेयर पार्ट्स की बढ़ती कीमतों के कारण पर्वतीय मार्गों पर माल भाड़ा 8 से 10 फीसदी तक बढ़ सकता है। देवभूमि ट्रांसपोर्ट महासंघ जल्द लेगा फैसला।

हल्द्वानी: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में आने वाले दिनों में आम जनता पर महंगाई की एक और मार पड़ सकती है। डीजल-पेट्रोल के दामों में निरंतर हो रही बढ़ोतरी और वाहनों की संचालन लागत बढ़ने के कारण देवभूमि ट्रांसपोर्ट महासंघ ने पहाड़ों के माल भाड़े में वृद्धि करने के साफ संकेत दे दिए हैं। महासंघ के पदाधिकारियों के अनुसार, जल्द ही एक आपातकालीन बैठक का आयोजन किया जाएगा, जिसमें माल भाड़े की दरों को बढ़ाने पर अंतिम मुहर लगाई जा सकती है।
ट्रांसपोर्ट महासंघ के प्रदेश प्रवक्ता हरजीत सिंह चड्ढा और प्रदेश प्रभारी पंडित दिया किशन शर्मा ने बताया कि वर्तमान में परिवहन व्यवसाय गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है। डीजल और पेट्रोल के साथ-साथ लुब्रिकेंट्स (मोबिल ऑयल) की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि ने ट्रांसपोर्टर्स की कमर तोड़कर रख दी है। वाहन संचालन लगातार घाटे का सौदा साबित हो रहा है, जिससे गाड़ियों की मासिक किस्त (EMI) और चालक-परिचालक का वेतन निकालना भी वाहन स्वामियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
महासंघ के अध्यक्ष राकेश जोशी और देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल ट्रांसपोर्ट नगर के अध्यक्ष जसपाल सिंह कोहली ने कहा कि केवल ईंधन ही नहीं, बल्कि गाड़ियों के रख-रखाव से जुड़ी हर वस्तु महंगी हो चुकी है। बाजार में लोहा, एंगल, चेसिस पत्ती, बैटरी, टायर, स्पेयर पार्ट्स और डीजल एग्जास्ट फ्लूड (DEF) के दाम आसमान छू रहे हैं। इसके साथ ही हर साल बढ़ने वाले टोल टैक्स, आरटीओ (RTO) टैक्स और भारी-भरकम वाहन बीमा प्रीमियम ने ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों के सामने जीवन-मरण का संकट खड़ा कर दिया है।
आर्थिक दिवालियापन से बचने के लिए देवभूमि ट्रक ओनर महासंघ की आगामी बैठक में पर्वतीय मार्गों के माल भाड़े में लगभग 8% से 10% तक की वृद्धि का प्रस्ताव पारित होना तय माना जा रहा है। महासंघ का कहना है कि वे आम जनता को होने वाली असुविधा के प्रति बेहद संवेदनशील हैं, लेकिन आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू रखने और व्यवसाय को बचाने के लिए यह कड़ा कदम उठाना अनिवार्य हो गया है। भाड़ा बढ़ने से पहाड़ों में खाद्यान्न, घरेलू सामान और निर्माण सामग्री की कीमतों में तेजी आना स्वाभाविक है।

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