Report by : CWN Desk
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वन्यजीवों की वजह से बंजर खेतों में होगी दालचीनी, तिमूर और लैमनग्रास की खेती

मिशन दालचीनी तिमूर और लैमनग्रास के तहत सरकार किसानों को 1.14 करोड़ पौधे निशुल्क मुहैया कराएगी
देहरादून। वन्यजीवों की वजह से बंजर पड़े खेतों में सरकार दालचीनी, तिमूर और लैमनग्रास सरीखी संगध प्रजातियों की पौधों की खेती को बढ़ावा देगी।
मिशन दालचीनी तिमूर और लैमनग्रास के तहत सरकार किसानों को 1.14 करोड़ पौधे निशुल्क मुहैया कराएगी। इसके प्रथम चरण में शनिवार को कृ़षि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने अपने कैंप ऑफिस से छह जिलों के लिए तीन लाख पौधों की खेप को रवाना किया। प्रदेश में करीब 200 हेक्टेयर में इनकी खेती करने का लक्ष्य है। इस मौके पर कृषि मंत्री ने कहा तिमूर के प्रचार- प्रसार, तकनीकी प्रशिक्षण, प्रसंस्करण आदि के लिए पिथौरागढ़ के विषाण गांव में तिमूर सेटेलाईट सेन्टर और दालचीनी के लिए चंपावत के खतेड़ा में सिनामन सेटेलाइट सेंटर विकसित किया जा रहा है। जंगली जानवरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने की वजह से पर्वतीय क्षेत्रों में लोग खेती छोड़ रहे हैं। यदि लोग संगध पौधों की खेती करें तो वन्यजीवों से फसलों को नुकसान भी नहीं होगा और उनकी आजीविका भी बढे़गी। उत्तराखंड की दालचीनी, तिमूर और लैमनग्रास उच्चकोटी की है। उन्होंने कहा कि सेलाकुईं स्थित संगध पौधा केंद्र-कैप से विभिन्न प्रजातियों की उत्कृष्ट पौध तैयार कराई जा रही है। राज्य में इस वर्ष 250 हेक्टेयर क्षेत्रफल में लैमनग्रास की खेती का लक्ष्य रखा गया है।
कैप निदेशक नृपेन्द्र चौहान ने संगध पौंधे के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कहा कि इनकी खेती राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।

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