Connect with us

उत्तराखण्ड

बर्फ की चादर की जगह बुग्यालों में लगी आग

Published

on

खबर शेयर करें 👉

ग्लोबल वार्मिंग से बुग्यालों में नहीं पड़ रही बर्फबारी
पिथाैरागढ़। जिन बुग्यालों में जनवरी में दो से ढाई फीट तक बर्फ रहती थी वहां आजकल धुआं उठ रहा है। जमी बर्फ पिघल चुकी है। हिमनगरी से चर्चित मुनस्यारी बाजार तो दूर 10 हजार फीट की ऊंचाई पर खलिया टाप के पाश्र्व के बुग्यालों में आग लगी है।
जनवरी में जिस खलियाटाप में चार, पांच फीट के आसपास बर्फ रहने से चांदी सी चमक रहती थी वहां से उठ रहा धुआं पर्यावरणविदों के लिए भी चिंता का विषय बन चुका है। 30 दिसंबर को हल्का हिमपात हुआ जो दूसरे दिन पिघल गया
है। बुग्यालों में लगी इस आग से सबसे अधिक खतरा बुग्यालों में शरण लिए कस्तूरा मृग सहित मोनाल व अन्य पशु पक्षियों के लिए बना हुआ है। बीते वर्ष 2021 में मुनस्यारी से लेकर खलिया तक छह बार हिमपात हो चुका था।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड में 38वें राष्ट्रीय खेलों का आगाज, हल्द्वानी में ट्रायथलॉन से हुई शुरुआत

इस समय युवा मुनस्यारी के निकट पातलथौड़, बलाती, बिटलीधार व खलिया में
स्नो स्कीइंग का आनंद उठा रहे थे । इस वर्ष अभी बीते दिनों 30 दिसंबर को हल्का हिमपात मात्र हुआ जो दूसरे ही दिन पिघल गया था। मुनस्यारी के खलिया टाप, हंसलिंग की तलहटी, बुई पातों के बुग्यालों में आग लगी है। आग बेशक मानवों द्वारा लगाई गई है, परंतु जहां पर बर्फ जमी रहती थी, वहां पर आग तेजी से फैल रही है।

आग पर नियंत्रण के लिए वन विभाग की टीम मौके को रवाना हो चुकी है, परंतु
वर्षा और हिमपात के अभाव में बुग्यालों में सूखी घास में आग तेजी से बढ़
रही है और बुग्यालों से उठने वाला धुआं पर्यावरण के लिए खतरे की घंटी बजा
रहा है। आज से पूर्व 2005 में भी मौसम का मिजाज लगभग इस वर्ष जैसा ही रहा था। तब जनवरी प्रथम सप्ताह में बर्फीले क्षेत्र के बुग्यालों में आग लगी थी। 2005 में 21 से लेकर 23 जनवरी तक जब हिमपात हुआ था। इसके बाद वर्ष 2018 में भी मौसम का रंग बदला रहा। इस वर्ष भी खलिया के बुग्यालों में आग
लगी थी। तब फरवरी में जाकर हिमपात हुआ था।

Select Language

Advertisement