देहरादून
अंकिता भंडारी केस में VIP का खुलेगा रहस्य: अब CBI करेगी साक्ष्य मिटाने के आरोपों की जांच
अंकिता भंडारी हत्याकांड में VIP की संलिप्तता और साक्ष्य मिटाने के आरोपों की जांच अब CBI करेगी। डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की तहरीर पर FIR दर्ज, सीएम ने दिए निर्देश।
देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक बड़ा प्रशासनिक मोड़ आया है। मामले में कथित ‘वीआईपी’ (VIP) की संलिप्तता और सबूतों को नष्ट करने के आरोपों की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा की जाएगी। पुलिस महानिरीक्षक (IG) राजीव स्वरूप ने शनिवार को प्रेस वार्ता में पुष्टि की कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस प्रकरण से संबंधित फाइल शासन को भेज दी गई है, जहाँ से इसे औपचारिक रूप से सीबीआई को सौंप दिया जाएगा।
डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की तहरीर पर FIR दर्ज
इस नई जांच का मुख्य आधार पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की शिकायत बनी है। उनकी तहरीर पर देहरादून के बसंत विहार थाने में शुक्रवार देर रात प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। डॉ. जोशी ने महानिदेशक को दी शिकायत में स्पष्ट किया है कि भले ही मुख्य आरोपियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन सोशल मीडिया और जनमानस में ‘VIP’ के नाम और साक्ष्य मिटाने को लेकर अभी भी संदेह बरकरार है। इन रहस्यों से पर्दा उठाना पूर्ण न्याय के लिए अनिवार्य है।
पुलिस ने अब तक की जांच पर दी सफाई
प्रेस वार्ता के दौरान आईजी राजीव स्वरूप ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड पुलिस ने शुरुआत से ही इस मामले की गहनता से जांच की है। एक महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने ठोस साक्ष्य जुटाए, जिसके कारण तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा हुई और उन्हें एक दिन की भी जमानत नहीं मिली। पुलिस का कहना है कि विभाग ने अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाई है, लेकिन पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अब जांच केंद्रीय एजेंसी को दी जा रही है।
सरकार का संदेश: कुछ भी नहीं छुपाया जाएगा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वयं अंकिता के माता-पिता से बात कर उन्हें निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है। सरकार इस कदम के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि वह इस संवेदनशील मामले में किसी भी स्तर पर कुछ भी छिपाना नहीं चाहती। पुलिस ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया की अफवाहों पर ध्यान न दें। यदि किसी के पास इस मामले से जुड़ा कोई गुप्त साक्ष्य है, तो वह सीधे जांच एजेंसी को उपलब्ध कराए।
