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नई दिल्ली

ब्लैक फ्राइडे: शेयर बाजार में मची भगदड़, निवेशकों के डूबे 10 लाख करोड़ रुपये

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शुक्रवार को शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी 2% तक गिरे, जबकि रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। जानिए गिरावट की बड़ी वजह।

मुम्बई। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली। शुक्रवार को बाजार लाल निशान पर बंद हुआ, जिससे निवेशकों में अफरा-तफरी का माहौल रहा। बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में ही करीब 2 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस तेज बिकवाली के चलते बीएसई (BSE) में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में से करीब 10 लाख करोड़ रुपये पलक झपकते ही साफ हो गए।
आंकड़ों की बात करें तो 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1470.50 अंक यानी 1.93 प्रतिशत लुढ़ककर 74,563.92 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 488.05 अंक या 2.06 प्रतिशत गिरकर 23,151.10 के स्तर पर आ गया। केवल शेयर बाजार ही नहीं, बल्कि भारतीय रुपया भी अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे गिरकर 92.45 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे वैश्विक कारण प्रमुख हैं। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने बताया कि पश्चिम एशियाई संघर्ष (Middle East Conflict) के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली ने लार्ज-कैप और ब्लू-चिप शेयरों पर भारी दबाव बना दिया है। अमेरिकी बाजारों की कमजोरी ने भी भारतीय सेंटीमेंट को नुकसान पहुंचाया है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने आग में घी डालने का काम किया है। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड अब 100.05 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। तेल की कीमतों में इस उछाल से महंगाई बढ़ने का डर पैदा हो गया है, जिससे बाजार में सुधार की उम्मीद फिलहाल कम दिख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में अस्थिरता का यह दौर जारी रह सकता है।

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