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उत्तराखण्ड

फर्जीवाड़ा रोकने को सख्ती: उत्तराखंड में 3 साल के स्थायी निवास प्रमाणपत्रों की होगी सघन जांच

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हल्द्वानी में फर्जी प्रमाणपत्र मामले के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 3 साल में बने सभी स्थायी निवास प्रमाणपत्रों की जांच के आदेश दिए हैं। फर्जी दस्तावेजों से बाहरी लोगों के बसने पर चिंता व्यक्त करते हुए धामी ने दोषियों पर सख़्त कार्रवाई के निर्देश दिए। अन्य महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए गए।

देहरादून। उत्तराखंड में फर्जी दस्तावेजों के जरिए स्थायी निवास प्रमाणपत्र (Permanent Residence Certificate) बनाने की शिकायतों पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख़्त रुख अपनाया है। सोमवार को दिल्ली से राज्य के पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक में मुख्यमंत्री ने पिछले तीन साल में बनाए गए सभी स्थायी निवास प्रमाणपत्रों की सघन जाँच के आदेश दिए हैं।
हल्द्वानी मामले के बाद लिया गया निर्णय
यह बड़ा फैसला हाल ही में हल्द्वानी में सामने आए एक मामले के बाद लिया गया है, जिसमें उत्तर प्रदेश (यूपी) के एक व्यक्ति का फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उत्तराखंड का स्थायी निवास प्रमाणपत्र बना दिया गया था। करीब चार घंटे चली इस समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने जाली दस्तावेजों से आधार, राशन और निवास प्रमाणपत्र बनने की बढ़ती शिकायतों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए राज्य में बाहरी लोगों को बसाया जाना एक बेहद गंभीर विषय है, जिस पर तत्काल रोक लगाना आवश्यक है।
दोषियों पर होगी सख़्त कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रमाणपत्रों की जाँच तत्काल शुरू की जाए। उन्होंने साफ़ कहा कि इस फर्जीवाड़े में जो भी अधिकारी, कार्मिक या आम व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने दिल्ली में हुई आतंकी घटना के मद्देनजर राज्य में प्रवेश करने वाले दूसरे राज्यों के वाहनों की सघन जाँच करने को भी कहा। उन्होंने सत्यापन अभियान में तेजी लाने और सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध व्यक्तियों पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश भी जारी किए।
अन्य महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए
बैठक में स्थायी निवास प्रमाणपत्रों की जाँच के अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को कई अन्य महत्वपूर्ण निर्देश भी दिए:
* आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्निर्माण कार्यों में तेजी लाई जाए और ठंड से बचाव के लिए पुख्ता प्रबंध किए जाएं।
* शीतकालीन यात्रा के लिए पर्यटक स्थलों पर सड़क, पेयजल, पार्किंग आदि की व्यवस्था मजबूत हो।
* ‘ड्रग्स फ्री उत्तराखंड’ अभियान को गति देने के लिए पुलिस मुख्यालय (PHQ) में एक पृथक टीम का गठन किया जाए।
* स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अस्पतालों में महिला और बाल रोग डाक्टरों की शतप्रतिशत तैनाती सुनिश्चित की जाए। इसके लिए रिक्त पदों की सूची तत्काल उपलब्ध कराई जाए। दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाए।

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