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उत्तराखण्ड

यूकेएसएसएससी परीक्षा में पेपर बाहर आने से हड़कंप, दो महिलाएं हिरासत में

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देहरादून। रविवार को आयोजित उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की स्नातक स्तरीय परीक्षा में बड़ा विवाद खड़ा हो गया। परीक्षा शुरू होने के महज 35 मिनट बाद ही प्रश्नपत्र के तीन पन्ने सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। घटना सामने आते ही पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया। आयोग ने स्वीकार किया कि पेपर के कुछ पन्ने परीक्षा केंद्र से बाहर आए, लेकिन इसे “पेपर लीक” मानने से इनकार कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने जांच के लिए पुलिस और एसटीएफ को पत्र लिखा है।
रविवार को पटवारी, वीपीडीओ व वीडीओ समेत 416 पदों के लिए प्रदेशभर के 445 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा कराई गई। परीक्षा सुबह 11 बजे शुरू हुई थी। 11:35 बजे के आसपास पेपर के तीन पन्ने सोशल मीडिया पर फैल गए। आयोग अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया ने कहा कि प्रश्नपत्र का कुछ हिस्सा बाहर आया है, लेकिन इसे लीक नहीं कहा जा सकता क्योंकि सभी केंद्रों में जैमर लगे थे और पेपर फॉरवर्ड होना तकनीकी रूप से संभव नहीं था। उन्होंने माना कि यह चौंकाने वाली घटना है और इसकी गहन जांच कराई जाएगी।
इस बीच, बेरोजगार संगठनों और विपक्षी दलों—कांग्रेस व यूकेडी ने सरकार और आयोग पर निशाना साधते हुए सोमवार को प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। उनका कहना है कि लगातार हो रही गड़बड़ियां बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं।
देर शाम एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ कि एक परीक्षा केंद्र से अभ्यर्थी खालिद मोहम्मद ने प्रश्नपत्र का हिस्सा अपनी परिचित टिहरी निवासी प्रोफेसर सुमन को भेजा। सुमन ने प्रश्न हल कर दिए। इसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। साथ ही खालिद की बहन, जो परीक्षा में शामिल थी, को भी पकड़ा गया है। पुलिस के अनुसार परीक्षा के दौरान खालिद और उसकी बहन सुमन से फोन पर संपर्क में थे। परीक्षा खत्म होने के बाद खालिद फरार हो गया है, जिसकी तलाश जारी है। जानकारी के मुताबिक खालिद पहले संविदा पर पीडब्ल्यूडी में कार्यरत रह चुका है।
इस पूरे घटनाक्रम ने आयोग की परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां आयोग “पेपर लीक” की पुष्टि से बच रहा है, वहीं बेरोजगार युवा और विपक्ष इसे सीधा भ्रष्टाचार से जोड़कर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। अब पुलिस और एसटीएफ की जांच ही तय करेगी कि परीक्षा की पारदर्शिता पर कितना असर पड़ा है।

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