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हल्द्वानी

वनभूलपुरा अतिक्रमण: 50 हजार लोगों के भविष्य का सुप्रीम फैसला कल, हल्द्वानी में हाई अलर्ट

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उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित वनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण हटाने के मामले में कल सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाएगा। 50,000 लोगों की किस्मत दांव पर है। जानें दंगे की आशंका और सुरक्षा बलों की तैनाती के बारे में।

हल्द्वानी: हल्द्वानी स्थित वनभूलपुरा क्षेत्र में कल बुधवार को सुप्रीम कोर्ट एक बड़ा और संवेदनशील फैसला सुनाने जा रहा है। यह फैसला रेलवे की 30 हेक्टेयर भूमि पर अवैध रूप से काबिज करीब 50 हजार लोगों के भविष्य का निर्धारण करेगा। यहां लगभग 5500 मकानों को अतिक्रमण माना गया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पहले ही इन अवैध कब्जों को हटाने का आदेश दिया था, जिसे दूसरी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस महत्वपूर्ण फैसले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे हल्द्वानी शहर को छावनी में बदल दिया गया है, और पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं।
शहर में तनाव का माहौल है, जिसे देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। दो साल पहले वनभूलपुरा में हुए भयानक दंगे की कड़वी यादें अभी भी ताजा हैं। दंगाईयों ने पुलिस स्टेशन फूंक दिया था और शहर में आग लगा दी थी। इसी आशंका को देखते हुए नैनीताल पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए तीन एएसपी, चार सीओ, 12 इंसपेक्टर, 400 से अधिक कांस्टेबल, और तीन कंपनी पीएसी को तैनात किया गया है। सीआरपीएफ को भी बुलाया जा रहा है और संवेदनशील इलाकों पर ड्रोन से लगातार निगरानी रखी जा रही है।
नैनीताल के एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी ने सभी नागरिकों से शांति बनाए रखने और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि माहौल खराब करने या अफवाह फैलाने की कोशिश करने वाले अराजक तत्वों से सख्ती से निपटा जाएगा। आज पुलिस ब्रीफिंग के बाद वनभूलपुरा क्षेत्र में फ्लैग मार्च भी निकाला गया, जिसका उद्देश्य लोगों के बीच विश्वास पैदा करना और कानून व्यवस्था बनाए रखना है। सुरक्षा बल चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
यह पूरा मामला रेलवे की जमीन पर हुए अवैध कब्जे से जुड़ा है। राजनीतिक संरक्षण के कारण यह अतिक्रमण वर्षों से फलता-फूलता रहा। अब जब कानून अपना काम कर रहा है, तो 50 हजार से अधिक लोग अपने आशियाने को लेकर चिंतित हैं। सभी की निगाहें कल आने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं। यह फैसला न केवल हल्द्वानी, बल्कि देश में सरकारी भूमि पर हुए अवैध वनभूलपुरा अतिक्रमण के मामलों के लिए भी एक नजीर साबित हो सकता है।

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