Report by : CWN Desk
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कोटाबाग-हल्द्वानी में आसमानी आफत: ओलावृष्टि और भारी बारिश से गेहूं की फसल बर्बाद

नैनीताल के कोटाबाग और हल्द्वानी में बेमौसम बारिश और तूफान ने कहर ढाया है। पकने को तैयार गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।

नैनीताल। जिले के कोटाबाग और हल्द्वानी क्षेत्रों में कुदरत के कहर ने किसानों की कमर तोड़ दी है। शनिवार रात से शुरू हुई बेमौसम बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि के कारण गेहूं की खड़ी और कटी हुई फसल को भारी नुकसान पहुँचा है। खेतों में पकने के लिए तैयार सुनहरी फसल तेज हवाओं के थपेड़ों के कारण जमीन पर बिछ गई है, जिससे किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फिर गया है।
कोटाबाग के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति काफी चिंताजनक बनी हुई है। किसानों का कहना है कि गेहूं की फसल पूरी तरह तैयार थी और कुछ ही दिनों में कटाई शुरू होने वाली थी। लेकिन अचानक आए इस तूफानी मौसम ने पूरी गणना बिगाड़ दी है। तेज बारिश के कारण खेतों में जलभराव हो गया है, जिससे गेहूं के दाने काले पड़ने और फसल के सड़ने की आशंका बढ़ गई है।
स्थानीय काश्तकारों के अनुसार, जब फसल खेतों में गिर जाती है, तो उसकी गुणवत्ता और पैदावार दोनों में भारी गिरावट आती है। जमीन पर लेटी हुई फसल की कटाई करना भी एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इसमें हार्वेस्टर मशीनों का उपयोग संभव नहीं हो पाता और मजदूरों की लागत बढ़ जाती है। प्रकृति की इस मार ने मेहनतकश किसानों की उम्मीदों को गहरी चोट पहुँचाई है, जिससे वे अब आर्थिक संकट में हैं।
हल्द्वानी के मैदानी इलाकों में भी ओलावृष्टि ने गेहूं के साथ-साथ फलों और सब्जियों के बगीचों को नुकसान पहुँचाया है। भारी जलभराव के कारण मिट्टी की उर्वरता और फसल की जड़ों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का तुरंत मुआयना किया जाए। किसानों को डर है कि यदि जल्द ही मौसम साफ नहीं हुआ, तो उनकी पूरी जमा-पूंजी मिट्टी में मिल जाएगी।
बेमौसम की यह बारिश उत्तराखंड के कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ा झटका है। किसानों ने राज्य सरकार से मुआवजे और फसल बीमा योजना के तहत राहत प्रदान करने की गुहार लगाई है। फिलहाल, कोटाबाग और हल्द्वानी के किसान मायूस होकर अपने बर्बाद हुए खेतों को देख रहे हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह संकट की इस घड़ी में अन्नदाताओं की हर संभव सहायता सुनिश्चित करे।

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