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नैनीताल

पिरूल से बनेगी बिजली: नैनीताल में लगेंगे विद्युत उत्पादन संयंत्र, वनाग्नि से बचेगा जंगल

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नैनीताल जिले में अब जंगलों की आग का प्रमुख कारण बनने वाले पिरूल (चीड़ की सूखी पत्तियां) से बिजली बनाई जाएगी। इसके लिए वन विभाग ने उत्तरकाशी की एक संस्था के साथ अनुबंध किया है। इस पहल का उद्देश्य न केवल जंगलों को आग से बचाना है, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार भी प्रदान करना है।

पिरूल से बिजली उत्पादन की शुरुआत वर्ष 2020 में उत्तरकाशी जिले के चकोन धनारी पट्टी में की गई थी, जहां सितंबर में गंगाड़ी पिरूल विद्युत उत्पादन संयंत्र लगाया गया था। यह संयंत्र 25 किलोवाट क्षमता का है और इसका संचालन महादेव सिंह गंगाड़ी करते हैं। उन्होंने बताया कि पिरूल से बिजली और चारकोल बनाने से ग्रामीणों को रोजगार मिलता है, साथ ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी कम होती हैं जिससे वन्यजीव और वन संपदा की रक्षा होती है।

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इस सफलता को देखते हुए अब इस मॉडल को कुमाऊं क्षेत्र में भी लागू किया जा रहा है। नैनीताल जिले के कालाढूंगी में 25 किलोवाट क्षमता का एक संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा जिले के हर वन प्रभाग में एक-एक छोटी इकाई भी लगाई जाएगी, जहां पिरूल को एकत्र कर उसका प्राथमिक प्रसंस्करण किया जाएगा। इसके बाद इसे मुख्य संयंत्र में बिजली उत्पादन के लिए भेजा जाएगा।

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यह योजना न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ग्रामीण विकास और सतत ऊर्जा उत्पादन की दिशा में भी एक प्रभावी पहल मानी जा रही है।

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