उत्तराखण्ड
उत्तराखंड: मेधावी दिव्यांगों के लिए सिविल सेवा कोचिंग के नियमों में बड़ा बदलाव
सीएम धामी के निर्देश पर दिव्यांग छात्र-छात्राओं के लिए सिविल सेवा ऑनलाइन कोचिंग योजना की आय सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 8 लाख हुई। अब अधिक मेधावी उठा सकेंगे लाभ।
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राज्य के मेधावी दिव्यांग छात्र-छात्राओं के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रदेश की अनूठी सिविल सेवा ऑनलाइन कोचिंग योजना के तहत अब पारिवारिक आय की सीमा को 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये सालाना कर दिया गया है। समाज कल्याण निदेशक डॉ. संदीप तिवारी ने बुधवार को इस बदलाव की पुष्टि करते हुए बताया कि यह कदम छात्रों की बढ़ती मांग और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
निदेशक डॉ. तिवारी के अनुसार, पूर्व में निर्धारित 2 लाख रुपये की आय सीमा के कारण कई योग्य छात्र इस योजना का लाभ उठाने से वंचित रह रहे थे। अब आय सीमा 8 लाख रुपये होने से प्रदेश के मध्यम वर्गीय दिव्यांग मेधावी छात्र भी प्रतिष्ठित संस्थानों के माध्यम से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) जैसी परीक्षाओं की तैयारी घर बैठे मुफ्त में कर सकेंगे।
इस योजना के तहत आवेदन करने की अंतिम तिथि 24 दिसंबर 2025 निर्धारित की गई है। इच्छुक अभ्यर्थी समाज कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से आवेदन पत्र मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं। भरे हुए आवेदनों को हल्द्वानी स्थित निदेशालय भेजा जा सकता है या ऑनलाइन गूगल फॉर्म के माध्यम से भी जमा किया जा सकता है।
योजना के लिए पात्रता की शर्तें भी काफी स्पष्ट हैं। आवेदक उत्तराखंड का मूल निवासी होना चाहिए और स्नातक तृतीय वर्ष (Final Year) में अध्ययनरत होना चाहिए। साथ ही, अभ्यर्थी की दिव्यांगता 40 प्रतिशत या उससे अधिक होना अनिवार्य है। सरकार का लक्ष्य जनवरी 2026 से इन कक्षाओं को विधिवत रूप से शुरू करना है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा नवंबर में घोषित यह योजना राज्य के दिव्यांग युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इससे न केवल आर्थिक रूप से कमजोर बल्कि मेधावी दिव्यांग छात्रों को भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा दिखाने का समान अवसर मिलेगा।
