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गुलदार-सूअरों के आतंक से गरमाया पौड़ी गढ़वाल, दुगड्डा में ग्रामीणों की विशाल रैली
दुगड्डा के जयगांव-भट्टगांव में जंगली जानवरों के हमलों से परेशान ग्रामीणों ने निकाली रैली। वैज्ञानिकों ने गुलदार को वर्मिन घोषित करने की मांग की। पढ़ें पूरी खबर।
पौड़ी गढ़वाल। जिले के अंतर्गत विकासखंड दुगड्डा में जंगली जानवरों के लगातार बढ़ते हमलों से उग्र ग्रामीणों का धैर्य आखिरकार टूट गया। ग्राम सभा जयगांव के अंतर्गत भट्टगांव, जयगांव और आसपास के गांवों के ग्रामीणों ने वन्यजीवों के आतंक के खिलाफ एक विशाल जनसभा का आयोजन किया। इसके पश्चात 11 और 12 अगस्त को ग्रामीणों ने क्षेत्र में एक उग्र जन आक्रोश रैली निकाली।
रैली के दौरान ग्रामीणों ने शासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि ‘वोट उसी को मिलेगा जो हमें जंगली जानवरों से बचाएगा।’ ग्रामीणों ने गुलदार का संरक्षण तुरंत बंद करने, संविधान के तहत निडर होकर जीने का अधिकार देने तथा जंगली सूअरों व बंदरों से खेती की सुरक्षा की पुरजोर मांग उठाई। क्षेत्र में बढ़ते हादसों से लोगों का जीना दुश्वार हो चुका है।
जनसभा को संबोधित करते हुए अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पर्यावरणविद एवं गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डॉ. दिनेश चंद्र भट्ट ने बताया कि क्षेत्र में गुलदार की संख्या वनों की धारण क्षमता से 6 गुना अधिक हो चुकी है। उन्होंने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत गुलदार, बंदरों और सूअरों को वर्मिन घोषित कर इनकी कलिंग (मारने) के आदेश जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जानवरों के डर से खेती बंद होने से पारंपरिक फसलें विलुप्त हो रही हैं, जो जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा है।
डॉ. भट्ट ने चेतावनी दी कि वर्तमान में इस ग्रामीण इलाके में 3 गुलदार और उनके शावक सक्रिय हैं, जो आने वाले हफ्तों में ग्रामीणों के लिए दोगुना खतरा पैदा करेंगे। करीब दो दशक पूर्व भी इसी क्षेत्र में गुलदार ने 2 साल में 7 लोगों को मार डाला था। हाल ही में जयगांव की यशोदा देवी गुलदार के हमले से बाल-बाल बचीं। ग्राम प्रधान सुमन बिष्ट, उप प्रधान निर्मल कुमार और 90 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक रामलाल जी ने भी सभा में अपने अनुभव साझा किए। ग्रामीणों ने एक प्रतिवेदन तैयार कर केंद्र व राज्य सरकार को भेजने का निर्णय लिया है।
