हल्द्वानी
नैनीताल पुलिस का बड़ा एक्शन: 56 लाख रुपये के 256 चोरी और खोए मोबाइल बरामद, देखें लिस्ट
SSP नैनीताल के निर्देश पर साइबर सेल ने देश के विभिन्न राज्यों से 256 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद फोन की अनुमानित कीमत करीब 56.25 लाख रुपये है।
नैनीताल। पुलिस को साइबर अपराध और मोबाइल रिकवरी के मामले में एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। एसएसपी (SSP) नैनीताल डॉ. मंजुनाथ टी.सी. के कड़े निर्देशों के बाद जनपद स्तर पर गठित मोबाइल ऐप सैल (साइबर सैल) ने देश के विभिन्न राज्यों से 256 गुमशुदा और चोरी हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद किए गए इन सभी स्मार्टफोन की अनुमानित कीमत लगभग 56,25,000 रुपये आंकी गई है। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ये सभी फोन उनके असली मालिकों को सौंप दिए हैं।
इस बड़े अभियान को सफल बनाने में एसपी नैनीताल डॉ. जगदीश चन्द्र और एसपी हल्द्वानी मनोज कत्याल का कुशल मार्गदर्शन रहा। वहीं क्षेत्राधिकारी ऑपरेशन अमित कुमार सैनी के पर्यवेक्षण में मोबाइल ऐप प्रभारी उपनिरीक्षक श्रीमती मीनू गौतम के नेतृत्व में पुलिस टीम ने शानदार काम किया। पुलिस टीम ने अप्रैल महीने से लेकर 24 जून 2026 तक प्राप्त हुईं विभिन्न शिकायतों के आधार पर काम शुरू किया था। टीम ने केंद्रीय उपकरण पहचान रजिस्टर यानी CEIR पोर्टल के माध्यम से इन मोबाइलों के आईएमईआई (IMEI) नंबर को सर्विलांस पर रखकर ट्रैक किया।
पुलिस टीम ने कड़ी मेहनत करते हुए इन मोबाइलों को उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्यों से रिकवर किया है। बरामद किए गए फोन में आईफोन (04), सैमसंग (35), ओप्पो (59), वन प्लस (10), वीवो (50) और रेडमी (19) समेत कई नामी ब्रांड्स के महंगे स्मार्टफोन शामिल हैं। अपना कीमती और खोया हुआ फोन वापस पाकर सभी शिकायतकर्ताओं के चेहरे खुशी से खिल उठे और उन्होंने नैनीताल पुलिस का दिल से आभार जताया।
इस बेहद सराहनीय और चुनौतीपूर्ण कार्य को समय पर पूरा करने के लिए एसएसपी नैनीताल ने मोबाइल रिकवरी टीम की पीठ थपथपाई है। उन्होंने शानदार काम करने वाली इस पुलिस टीम (उपनिरीक्षक मीनू गौतम, कांस्टेबल किशन सिंह कुंवर और कांस्टेबल रामचंद्र प्रजापति) के लिए 2,500 रुपये नकद पुरस्कार की घोषणा भी की है। पुलिस प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि मोबाइल खोने पर तुरंत उसकी शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते तकनीकी मदद से उसे ब्लॉक और ट्रैक किया जा सके।
