अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों को बड़ी राहत: अब RTO में ही होगी वाहनों की फिटनेस
केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा ने पर्वतीय जिलों के लिए फिटनेस नियमों में राहत की घोषणा की। अब उत्तरकाशी, अल्मोड़ा सहित 8 जिलों में मैन्युअल जांच जारी रहेगी।
देहरादून/अल्मोड़ा। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में रहने वाले वाहन स्वामियों के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ी राहत भरी खबर दी है। अल्मोड़ा सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने जानकारी दी है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने प्रदेश की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) से जुड़े नियमों में ढील देने का सकारात्मक निर्णय लिया है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड सरकार और विभिन्न मोटर वाहन संगठनों ने पर्वतीय क्षेत्रों में ATS केंद्रों की कमी और लंबी दूरी की व्यावहारिक समस्याओं को केंद्र के समक्ष रखा था। राज्य सरकार के इस आग्रह पर विचार करते हुए केंद्र ने तय किया है कि जब तक इन जिलों में ATS केंद्र पूरी तरह स्थापित नहीं हो जाते, तब तक RTO कार्यालयों में मैन्युअल फिटनेस जांच की पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी।
नये निर्णय के अनुसार, उत्तरकाशी, पौड़ी गढ़वाल, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिलों में वाहन स्वामी 1 जुलाई 2026 तक आरटीओ में मैन्युअल जांच करा सकेंगे। वहीं, टिहरी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, चमोली और बागेश्वर जिलों के लिए यह समय सीमा 31 दिसंबर 2026 तक तय की गई है। इस फैसले से उन हजारों वाहन स्वामियों को राहत मिलेगी जिन्हें फिटनेस के लिए मैदानी जिलों के चक्कर काटने पड़ रहे थे।
मंत्री अजय टम्टा ने स्पष्ट किया कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय का मुख्य उद्देश्य जनसुविधा को सर्वोपरि रखना है। भौगोलिक चुनौतियों के बीच विकास की गति को बनाए रखने और आमजन के हितों की रक्षा के लिए सरकार पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। अब इन 8 जिलों के लोगों को अत्याधुनिक टेस्टिंग सेंटर्स के बनने तक पुरानी प्रक्रिया का लाभ मिलता रहेगा।
इस निर्णय का विभिन्न ट्रांसपोर्ट यूनियनों और स्थानीय जनता ने स्वागत किया है। लंबे समय से मांग की जा रही थी कि बुनियादी ढांचा तैयार होने से पहले अनिवार्य एटीएस सिस्टम को लागू न किया जाए, जिसे अब सरकार ने स्वीकार कर लिया है।
