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अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़

चौखुटिया: ‘नशा नहीं, रोजगार दो’ आंदोलन की 42वीं वर्षगांठ पर हुंकार, जनगीतों से गूंजा बसभीड़ा

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अल्मोड़ा के चौखुटिया में ‘नशा नहीं, रोजगार दो’ आंदोलन की 42वीं वर्षगांठ मनाई गई। पी.सी. तिवारी ने राज्य की दुर्दशा पर उठाए सवाल। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

चौखुटिया (अल्मोड़ा): उत्तराखंड के ऐतिहासिक ‘नशा नहीं, रोजगार दो’ आंदोलन की 42वीं वर्षगांठ पर चौखुटिया क्षेत्र में जन-चेतना का सैलाब उमड़ा। चांदीखेत, क्रांतिवीर चौराहा और आंदोलन के उद्गम स्थल बसभीड़ा में सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने आम सभाओं के माध्यम से राज्य की वर्तमान स्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त की। इस दौरान अदम गोंडवी, गिर्दा और हीरा सिंह राणा के जनगीतों ने कार्यक्रम में जोश भर दिया।


उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) के केंद्रीय अध्यक्ष पी.सी. तिवारी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जिस अवधारणा के साथ उत्तराखंड राज्य बना था, वह आज तक साकार नहीं हो पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 25 वर्षों में राज्य ने विकास के बजाय केवल बर्बादी देखी है। तिवारी ने राष्ट्रीय दलों के विकल्प के रूप में क्षेत्रीय और संघर्षशील ताकतों को एकजुट होने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने अस्पताल, स्कूल, रोजगार और गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने जैसे मूल मुद्दों की अनदेखी पर सरकार को घेरा। सामाजिक कार्यकर्ता गणेश पांडे ने 40 साल पहले की एकजुटता को याद करते हुए फिर से एक बड़े आंदोलन की जरूरत बताई। वहीं, किरन आर्या ने महिलाओं से आगे आने की अपील की, ताकि समाज में अंकिता भंडारी जैसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।

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वरिष्ठ आंदोलनकारी मोहन सिंह किरौला की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आज प्रदेश में योग्य दिव्यांग युवाओं के पास भी आजीविका का साधन नहीं है। सभा में अल्मोड़ा, द्वाराहाट, गैरसैंण और जागेश्वर समेत कई क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और परिवर्तन की लड़ाई को जारी रखने का संकल्प लिया।

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