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उत्तराखण्ड

आपदाओं से 1944 करोड़ की क्षति, केंद्र से 5702 करोड़ की विशेष सहायता की मांग

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देहरादून। मानसून की आपदाओं ने उत्तराखंड को गहरी चोट दी है। राज्य में अब तक कुल 1944.15 करोड़ रुपये की संपत्तियों का नुकसान हो चुका है। इस भारी क्षति से उबरने के लिए राज्य सरकार ने केंद्र से 5702.15 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता मांगी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु के नेतृत्व में राज्य के अधिकारियों ने गुरुवार को दिल्ली में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य एवं विभागाध्यक्ष राजेंद्र सिंह और सचिव मनीष भारद्वाज को विस्तृत प्रस्ताव सौंपा। इस दौरान केंद्र ने राज्य को हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

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प्रमुख सचिव ने बताया कि अप्रैल से अगस्त तक सबसे अधिक नुकसान सड़कों को हुआ है। करीब 1163 करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़कें पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं। इसके अलावा सिंचाई, ऊर्जा निगम, शिक्षा और ग्राम्य विकास विभाग को लगभग 523.10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि कई परिसंपत्तियां, सड़कें, आबादी वाले क्षेत्र और बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट अब भी खतरे में हैं। यदि समय रहते ठोस इंतजाम नहीं किए गए, तो नुकसान और बढ़ सकता है। इन जोखिमों से बचाव और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए राज्य ने 3758 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आर्थिक सहायता की मांग की है।

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इस बीच, हालात का जायजा लेने के लिए आठ सितंबर को केंद्रीय अधिकारियों की एक टीम उत्तराखंड का दौरा करेगी। राज्य सरकार का कहना है कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास और सुरक्षा इंतजामों के लिए तत्काल आर्थिक सहयोग जरूरी है।

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