Connect with us

नई दिल्ली

रख हौसला

Published

on

खबर शेयर करें 👉

सर उठा और पग बढ़ा ,
किस सोच में है तू खड़ा।
देख कर कठिनाइयों को,
तू क्यों डरा, तू क्यों डरा।

मन्जिलें हैं अब पास तेरे ,
क्यों है तू खामोश खड़ा।
झूम उठेगा ये जहाँ भी ,
तू बस कदम बढ़ा,कदम बढ़ा।

यह भी पढ़ें 👉  नैनीताल एसओजी की कमान विजय पाल सिंह को मिली

जिन्दगी में हार का भी ,
सामना गर करना पड़े।
उन पलों में भी तू अब,
बस मुस्कुरा,बस मुस्कुरा।

एक दिन झुकना ही होगा,
मुश्किलों को तुम देखना।
हिम्मतों के साथ चलकर,
हौसलों को तू बढ़ा, तू बढ़ा।

यह भी पढ़ें 👉  1200 करोड़ के स्कैम में शामिल नेपाली को दबोचा

एक दिन तू छू ही लेगा,
आसमाँ के सिलवटों को,
मुस्कुराते हुए दिलों में तू,
दीप प्यार के जला प्यार के जला।

डॉ. कल्पना कुशवाहा ‘ सुभाषिनी ‘

Select Language

Advertisement