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हरिद्वार में विराट गीता महोत्सव: डॉ. आनंद भारद्वाज को ‘गीता रत्न’, बच्चों ने जीते पुरस्कार

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हरिद्वार में अध्यात्म चेतना संघ द्वारा आयोजित गीता महोत्सव में डॉ. आनंद भारद्वाज को गीता रत्न और 5 विभूतियों को हरिद्वार गौरव सम्मान दिया गया। जानें कौन रहे विजेता।

हरिद्वार: धर्मनगरी हरिद्वार के ज्वालापुर स्थित मोतीमहल मंडपम् में सोमवार को ‘अध्यात्म चेतना संघ’ द्वारा विराट गीता महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. आनंद भारद्वाज को उनके आध्यात्मिक योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘गीता रत्न सम्मान’ से नवाजा गया। समारोह में कला, खेल और चिकित्सा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली पांच अन्य विभूतियों को ‘हरिद्वार गौरव’ सम्मान प्रदान किया गया।
महोत्सव के दौरान पिछले माह आयोजित श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा की गई। इस प्रतियोगिता में डीपीएस रानीपुर की अनुष्का (कक्षा 6) ने प्रथम, शिवडेल पब्लिक स्कूल की हर्षिका ने द्वितीय और दीक्षा राइजिंग पब्लिक स्कूल के अब्दुल समी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। प्रतियोगिता प्रभारी महेश चन्द्र काला ने बताया कि इस ज्ञान महाकुंभ में 10 स्कूलों के लगभग 4,500 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया था।
मुख्य अतिथि डॉ. आनंद भारद्वाज ने अपने संबोधन में संस्कारों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “संस्कारों की शिक्षा केवल स्कूल की किताबों से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सनातनी वातावरण के निर्माण से संभव है।” कार्यक्रम की शुरुआत मंत्रोच्चारण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिसमें महंत किशन दास महाराज और संस्था के संस्थापक आचार्य करुणेश मिश्र प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
आचार्य करुणेश मिश्र ने बताया कि वर्ष 2013 से शुरू हुए इस ‘बाल संस्कार अभियान’ से अब तक 65 हजार से अधिक छात्र लाभान्वित हो चुके हैं। उन्होंने गीता को जीवन प्रबंधन का संपूर्ण ग्रंथ बताया। संस्था के अध्यक्ष नितिन गौतम ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत भूमि पर विद्या का पूजन सदैव शिक्षा से ऊपर रहा है, यही कारण है कि दुनिया भर से लोग विद्या प्राप्ति के लिए भारत आते हैं।
सांस्कृतिक संध्या में कवि अरुण कुमार पाठक और प्रसिद्ध कलाकार विपुल रूहेला की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। डीपीएस के छात्र अर्णिम मधुरेश के श्लोक पाठ से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इस अवसर पर उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के शोध अधिकारी डॉ. हरीश चंद गुरुरानी सहित शिक्षा और अध्यात्म जगत की कई बड़ी हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम का सफल संचालन बृजेश शर्मा द्वारा किया गया।

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