उत्तराखण्ड
बदरीनाथ धाम के कपाट बंद: 51 लाख श्रद्धालुओं ने किया चारधाम दर्शन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड!
दोपहर 2:56 बजे शीतकाल के लिए बदरीनाथ धाम के कपाट हुए बंद। इस वर्ष 51 लाख से अधिक भक्तों ने चारधाम यात्रा कर बनाया नया कीर्तिमान। अगले 6 महीने कहाँ होगी पूजा?
देहरादून। उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का मंगलवार को औपचारिक रूप से समापन हो गया है। भगवान बदरी विशाल के धाम बदरीनाथ धाम के कपाट दोपहर ठीक 2:56 बजे शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। कपाटबंदी की यह पारंपरिक रस्म मुख्य रावल अमरनाथ नंबूदरी ने निभाई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। इसी के साथ छह महीने के लिए चारधाम यात्रा भी स्थगित हो गई है।
कपाट बंद होने से पहले, मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया था। इस दौरान मंदिर को लगभग 12 कुंतल (1200 किलोग्राम) फूलों से सजाया गया था। परंपरा के अनुसार, भगवान बदरी विशाल को माना महिला मंगल दल द्वारा विशेष रूप से तैयार किया गया घृत कंबल (घी से लिपटा एक खास कंबल) ओढ़ाया गया। पूजा-अर्चना के बाद, उद्धव और कुबेर की मूर्तियों को गर्भगृह से बाहर लाया गया, जबकि देवी लक्ष्मी को अंदर विराजमान किया गया और फिर औपचारिक रूप से कपाट बंद कर दिए गए।
इस वर्ष की चारधाम यात्रा ने एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है। इस बार चारों धामों—यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ—में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का कुल आंकड़ा 51 लाख के पार पहुंच गया है। यह पिछले वर्ष के 48 लाख के आंकड़े से कहीं अधिक है, जो उत्तराखंड के पर्यटन और धार्मिक आस्था के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इस वर्ष केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में दर्शन करने वाले भक्तों ने भी रिकॉर्ड बनाया है।
कपाट बंद होने के बाद, अब श्रद्धालु शीतकाल के दौरान पांडुकेश्वर में स्थित योगध्यान बदरी मंदिर में भगवान बदरीनाथ की पूजा-अर्चना और दर्शन कर सकेंगे। अब चारों धामों की शीतकालीन पूजा उनके प्रवास स्थल पर होगी। इस भारी सफलता के बावजूद, सरकार और प्रशासन ने अगले वर्ष की यात्रा के लिए सुविधाओं और सुरक्षा को और बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही है। यह सफलता राज्य की धार्मिक पर्यटन क्षमता को दर्शाती है।
