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नई दिल्ली

हल्द्वानी रेलवे भूमि विवाद: सुप्रीम कोर्ट में पुनर्वास और मुआवजे को लेकर तीखी बहस, अब 19 मार्च को सुनवाई

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हल्द्वानी के बनभूलपुरा रेलवे जमीन मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। केंद्र और उत्तराखंड सरकार ने पुनर्वास और मुआवजे पर हलफनामा पेश किया। जानें कोर्ट ने क्या कहा।

नई दिल्ली: हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने उत्तराखंड सरकार और रेलवे ने अपना संयुक्त हलफनामा पेश किया। कोर्ट ने इस दौरान प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और भूमि के मालिकाना हक जैसे गंभीर कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
सुनवाई के दौरान रेलवे ने स्पष्ट किया कि कुल 13 मामले ऐसे हैं जहाँ भूमि ‘फ्रीहोल्ड’ श्रेणी में आती है। इन विशिष्ट मामलों के लिए मुआवजे का प्रस्ताव दिया गया है। वहीं, जो लोग रेलवे की जमीन पर अवैध रूप से बसे हैं, उन्हें राज्य सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत वैकल्पिक घर देने की बात कही गई है। रेलवे ने विस्तार कार्य के लिए जमीन की तत्काल आवश्यकता बताई है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि यहाँ 50 हजार से अधिक लोग प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इनमें से बहुत कम लोग ही पीएम आवास योजना की पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं। भूषण ने मांग की कि जो परिवार इस योजना के दायरे में नहीं आते, उनके पुनर्वास के लिए भी सरकार के पास एक स्पष्ट और ठोस नीति होनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक भूमि पर निजी संपत्ति की तरह दावा नहीं किया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने मानवीय आधार पर पुनर्वास और कानून के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया। एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि ईडब्ल्यूएस (EWS) और अन्य श्रेणियों के तहत पात्र लोगों को आवास मुहैया कराए जाएंगे।
अदालत ने अब इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को तय की है। तब तक कोर्ट सरकार के सटीक आवास प्रस्तावों की समीक्षा करेगा। हल्द्वानी के इस मुद्दे पर फिलहाल पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह हजारों परिवारों के भविष्य से जुड़ा है।

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