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हरिद्वार: ‘रोटी की तलाश में बचपन खो गया’, परिक्रमा की गोष्ठी में भावुक हुए श्रोता

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हरिद्वार में परिक्रमा साहित्यिक मंच द्वारा कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। डॉ. अशोक गिरि और अन्य कवियों ने कविता के माध्यम से सामाजिक मुद्दों पर प्रहार किया।

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार के भेल सेक्टर-4 स्थित सामुदायिक केंद्र में ‘परिक्रमा साहित्यिक मंच’ द्वारा एक भव्य कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत परिक्रमा सचिव **शशिरंजन ‘समदर्शी’** की ओजस्वी पंक्तियों ‘संसद में संवाद शुरू है, नारी है जिसका उन्वान’ के साथ हुई। इस साहित्यिक संध्या में कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज के विभिन्न पहलुओं और ज्वलंत मुद्दों को उजागर किया।
गोष्ठी का विधिवत आरंभ माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन और राज कुमारी ‘राजेश्वरी’ की मधुर वाणी वंदना के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात छंद विज्ञानी **पं. ज्वाला प्रसाद शांडिल्य ‘दिव्य’** ने की, जबकि मंच का कुशल संचालन मदन सिंह यादव ने संभाला। वरिष्ठ कवि भूदत्त शर्मा और गीतकार सुभाष मलिक सहित कई दिग्गज साहित्यकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया।
महफिल में उस वक्त सन्नाटा छा गया जब **डाॅ. अशोक गिरि** ने अभावग्रस्त बच्चों की व्यथा सुनाते हुए कहा, “रोटी की तलाश में बचपन खो गया, नंगे पांव चलकर जीवन सो गया।” उनकी इन पंक्तियों ने समाज में व्याप्त विषमता पर गहरा कटाक्ष किया। वहीं, कवियित्री **चित्रा शर्मा ‘वीथिका’** और **राजकुमारी ‘राजेश्वरी’** ने नारी मन की वेदना और उसके अदम्य मनोबल को अपनी कविताओं में पिरोया।
युवा कवियों में दिव्यांश ‘दुष्यन्त’ और प्रभात रंजन ने अपने जोश से श्रोताओं को प्रभावित किया। **डाॅ. प्रशांत कौशिक** ने समसामयिक व्यवस्था पर चुटकी लेते हुए कहा कि ‘महबूब और सरकार में शायद गठजोड़ हो गया है।’ गोष्ठी में रवीना राज की गजलों और देवेन्द्र मिश्र के हौसले से भरे गीतों ने श्रोताओं की खूब तालियां बटोरीं। देर शाम तक चले इस कार्यक्रम ने हरिद्वार के साहित्यिक वातावरण को नई ऊर्जा प्रदान की।

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