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उत्तराखण्ड

प्रदेश में अब मूल निवास प्रमाणपत्र जारी करने के लिए मानक निर्धारित किए जाएंगे : धामी

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भू कानून का प्रारूप तय करने के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति को जिम्मा सौंपा
देहरादून। प्रदेश में अब मूल निवास प्रमाणपत्र जारी करने के लिए मानक निर्धारित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर भू कानून का प्रारूप तय करने के लिए गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति को इसका जिम्मा भी सौंपा गया है। समिति अब मूल निवास के मानकों का निर्धारण करते हुए सरकार को रिपोर्ट देगी।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उनके लिए राज्यहित सर्वाेपरि है। भू-कानून हो या मूल निवास का विषय, इस दिशा में सरकार संजीदगी से राज्यवासियों के साथ है। इन विषयों पर सम्यक रूप से विचार विमर्श कर अपनी स्पष्ट संस्तुति सरकार को उपलब्ध कराने के लिए अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है।
बदली परिस्थितियों में राज्य में सशक्त भू कानून की उठ रही मांग के दृष्टिगत मुख्यमंत्री धामी ने अगस्त में उच्च स्तरीय समिति गठित की थी। समिति को राज्य में औद्योगिक विकास के लिए भूमि की आवश्यकता और उपलब्ध भूमि के संरक्षण के मध्य संतुलन को ध्यान में रखकर विकास कार्य प्रभावित न हों, इसके दृष्टिगत संस्तुतियां देने के निर्देश दिए गए थे।
सितंबर में समिति ने 80 पृष्ठों में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी। समिति ने सभी डीएम से राज्य में अब तक दी गई भूमि क्रय की स्वीकृतियों का विवरण मांग कर उनका परीक्षण भी किया। समिति ने अपनी संस्तुति में ऐसे बिंदुओं को समाहित किया है, जिससे राज्य में विकास के लिए निवेश बढ़े और रोजगार के अवसरों में भी बढोतरी हो।
साथ ही भूमि का अनावश्यक दुरुपयोग रोकने की संस्तुति भी की है।समिति की इस रिपोर्ट का परीक्षण करने के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुक्रवार को अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी की अध्यक्षता में प्रारूप समिति गठित की गई। अब प्रारूप समिति का दायरा बढ़ाया गया है।
वह भू कानून से संबंधित प्रारूप तो सरकार को सौंपेगी ही, मूल निवास प्रमाणपत्र जारी करने के लिए मानकों का निर्धारण कर इस संबंध में भी संस्तुति शासन को सौंपेगी। बता दें कि सरकार ने 20 दिसंबर को आदेश जारी किया था कि विभिन्न प्रयोजनों के लिए मूल निवास प्रमाणपत्र धारकों को स्थायी निवास प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की बाध्यता नहीं होगी।

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