Report by : CWN Desk
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इसराइल-ईरान संघर्ष में परमाणु ठिकानों पर हमले, एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर खड़ी दुनिया

इसराइल और ईरान के बीच दशकों से चले आ रहे तनाव ने अब एक भीषण और खतरनाक युद्ध का रूप ले लिया है। शुक्रवार रात से शुरू हुए हमलों में इसराइल के लड़ाकू विमानों और ड्रोनों ने ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई इलाकों में तबाही मचाई। इसराइली हमलों का निशाना ईरान की सैन्य कमान और परमाणु ठिकाने बने। जवाब में ईरान ने शनिवार सुबह बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला कर दिया, जिससे तेल अवीव और यरुशलम के इलाकों में भारी नुकसान हुआ।

तेहरान में विस्फोटों की आवाज़ें गूंजती रहीं और वायु रक्षा प्रणालियाँ सक्रिय रहीं। ईरान के संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि के अनुसार, इन हमलों में 78 लोग मारे गए और 329 घायल हुए। वहीं, इसराइल ने रमत गन में एक महिला की मौत की पुष्टि की है और 20 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी दी है।

इसराइली अभियान का नाम ‘राइजिंग लायन’ रखा गया है, जिसे कई दिनों तक जारी रखने की योजना है। ईरान ने भी स्पष्ट किया है कि उसका जवाब अभी खत्म नहीं हुआ है। दोनों देशों की यह अब तक की सबसे गंभीर भिड़ंत है, जिससे वैश्विक चिंता गहरा गई है कि यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में तब्दील हो सकता है, जिसमें अमेरिका और अन्य वैश्विक शक्तियाँ भी शामिल हो सकती हैं।

ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि उन्होंने इसराइल के दर्जनों सैन्य और रक्षा ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। दूसरी ओर, इसराइल ने तेहरान की सैन्य कमान को नष्ट करने और नातांज़ स्थित परमाणु संवर्धन संयंत्र को गंभीर नुकसान पहुँचाने की बात कही है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने पुष्टि की है कि संयंत्र को नुकसान हुआ है और रेडियोलॉजिकल रिसाव की संभावना है, हालांकि वह अभी नियंत्रण में है।

इस बीच, अमेरिकी सेना भी इसराइल को मिसाइल अवरोधन में सहयोग दे रही है। अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी सैन्य संपत्ति का इस्तेमाल मिसाइलों को रोकने के लिए किया गया।

ईरान के दो शीर्ष सैन्य अधिकारी—जनरल मोहम्मद बाघेरी और जनरल होसैन सलामी—हमलों में मारे गए हैं। साथ ही, परमाणु वार्ता में शामिल वरिष्ठ नेता अली शमखानी और कुद्स फोर्स के प्रमुख इस्माइल ग़नी के भी मारे जाने की सूचना है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज़ हो गई है। इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ईरान की जनता से अपने नेताओं के खिलाफ खड़े होने की अपील की है, वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई ने इसराइल को कड़ी सज़ा देने की चेतावनी दी है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने भी बयान दिया कि ईरान को या तो परमाणु समझौता करना होगा या और गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस जटिल और उग्र टकराव ने मध्य पूर्व को एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।

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