नई दिल्ली
आनंद महिंद्रा ने की ‘फूलदेई’ की तारीफ, कहा- हैलोवीन से कहीं ज्यादा सुंदर है उत्तराखंड का यह त्योहार
महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने उत्तराखंड के ‘फूलदेई’ त्योहार को ग्लोबल बनाने की वकालत की। उन्होंने बच्चों के इस प्रकृति उत्सव को अपना मंडे मोटिवेशन बताया।
भारत अपनी विविध सांस्कृतिक विरासतों के लिए जाना जाता है, लेकिन कुछ त्योहार अपनी सादगी और संदेश से दिल जीत लेते हैं। उत्तराखंड के पहाड़ों में वसंत के आगमन पर मनाया जाने वाला ‘फूलदेई’ ऐसा ही एक पर्व है। हाल ही में महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस त्योहार का एक वीडियो साझा करते हुए इसकी खूबसूरती और गहरे अर्थों की सराहना की है।
https://x.com/anandmahindra/status/2033400416411566479?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E2033400416411566479%7Ctwgr%5E3cba4977fca9d6817bf6218e595dd9e8a81d4e93%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=https%3A%2F%2Fnavbharattimes.indiatimes.com%2Fviral%2Ftrending%2Fanand-mahindra-16-march-monday-motivation-post-on-uttarakhand-phool-dei-festival-compares-with-halloween-goes-viral%2Farticleshow%2F129603153.cms
आनंद महिंद्रा ने क्या कहा?
आनंद महिंद्रा ने ईमानदारी से स्वीकार किया कि उन्हें भी हाल ही तक इस अद्भुत त्योहार के बारे में जानकारी नहीं थी। उन्होंने लिखा, “मुझे यह स्वीकार करना होगा कि हाल ही तक मैंने ‘फूलदेई’ के बारे में नहीं सुना था। यह कितना सुंदर उत्सव है जहाँ बच्चे पहाड़ियों से ताजे फूल इकट्ठा करते हैं और घर-घर जाकर उन्हें दहलीज पर सजाते हैं।”
हैलोवीन बनाम फूलदेई: ‘मांगने’ नहीं ‘देने’ का त्योहार
महिंद्रा ने फूलदेई की तुलना पश्चिम के मशहूर ‘हैलोवीन’ (Halloween) से की, लेकिन दोनों के बीच एक बहुत ही मार्मिक अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने लिखा कि जहाँ हैलोवीन में बच्चे ‘ट्रिक-ऑर-ट्रीट’ (Trick-or-treat) के जरिए शरारत की धमकी देते हुए कुछ मांगते हैं, वहीं फूलदेई में बच्चे घर-परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हुए पहले ‘फूल’ भेंट करते हैं। उन्होंने बच्चों के उस गीत का भी जिक्र किया: “फूलदेई, छम्मा देई, देणी द्वार, भर भकार…” जिसका अर्थ है कि घर के भंडार भरे रहें और सुख-शांति आए।
ग्लोबल बनाने की वकालत
पर्यावरण जागरूकता के इस दौर में आनंद महिंद्रा ‘फूलदेई’ के प्रकृति के साथ जुड़ाव से बेहद प्रभावित दिखे। उन्होंने वकालत की कि जिस तरह होली ने पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई है, उसी तरह ‘फूलदेई’ को भी ग्लोबल पहचान मिलनी चाहिए। उन्होंने इन नन्हे बच्चों को अपना #MondayMotivation बताया, जो बिना किसी स्वार्थ के खुशियां और आशीर्वाद बांट रहे हैं।
संस्कृति का गौरव
आनंद महिंद्रा की यह पोस्ट केवल एक त्योहार का जिक्र नहीं है, बल्कि यह हमारी भारतीय संस्कृति के उस मूल मंत्र को दर्शाती है जो ‘मांगने’ से ज्यादा ‘देने’ और प्रकृति के संरक्षण में विश्वास रखती है। देवभूमि उत्तराखंड के इस “फूलों के त्योहार” को जब महिंद्रा जैसे दिग्गज का समर्थन मिला, तो सोशल मीडिया पर पहाड़ की संस्कृति को लेकर गर्व की एक नई लहर दौड़ गई।
