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अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़

सीएम धामी की अपील: ‘धरती मां’ को बचाने के लिए आगे आएं किसान, प्राकृतिक खेती से बढ़ेगी आय

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अल्मोड़ा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किसानों से मिट्टी और जल स्रोत बचाने का आह्वान किया। रासायनिक खाद छोड़ प्राकृतिक खेती अपनाने और महक क्रांति पर दिया जोर।

अल्मोड़ा: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि राज्य में चलाया जा रहा ‘खेत बचाओ आंदोलन’ अब एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का रूप ले चुका है। इस मुहिम के तहत प्रदेश के लाखों किसान अपनी मिट्टी, जल स्रोतों और पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार आगे आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अन्नदाताओं को समाज का वास्तविक नायक बताते हुए साफ किया कि किसानों की समृद्धि और उनका कल्याण वर्तमान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
हवालबाग, अल्मोड़ा में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने घटती उर्वरा शक्ति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक और असंतुलित उपयोग से भूमि की गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है। उन्होंने सभी किसानों से अपने खेतों की मिट्टी का नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण कराने और पारंपरिक प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर अपनाने का पुरजोर आह्वान किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि धरती मां के स्वास्थ्य की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने कोसी नदी सहित कुमाऊं क्षेत्र के घटते जल स्रोतों पर गहरी चिंता जताई। सीएम ने पहाड़ों के पारंपरिक गाड़-गधेरों, नौलों और धारों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार कृषि और सिंचाई योजनाओं पर विशेष ध्यान दे रही है, जिसके तहत पॉलीहाउस, वर्षा आधारित कृषि और फल उत्पादन के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आगे कहा कि राज्य में ‘महक क्रांति’ नीति के तहत एरोमा (सगंध) खेती का तेजी से विस्तार किया जा रहा है, जिससे किसानों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज हुई है। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से किसानों को एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान किया जा रहा है। बिचौलियों को खत्म कर योजनाओं का पूरा लाभ सीधे किसानों के बैंक खातों (DBT) तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने अंत में आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का सामूहिक संकल्प दिलाया।

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