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देहरादून

देहरादून: शहंशाही आश्रम से झड़ीपानी ट्रेक बना पर्यटकों की पहली पसंद, प्रकृति और सुकून का संगम।

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देहरादून के ओल्ड राजपुर रोड से झड़ीपानी तक की ट्रेकिंग अब रोमांच और शांति का नया केंद्र है। जानें कैसे यह मार्ग स्थानीय आजीविका और आत्मनिर्भर भारत को दे रहा है बढ़ावा।

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में प्रकृति प्रेमियों के लिए ओल्ड राजपुर रोड स्थित शहंशाही आश्रम से झड़ीपानी तक का ट्रेकिंग मार्ग इन दिनों आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह यात्रा केवल शारीरिक कसरत या रोमांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर कदम पर प्रकृति की अनुपम छटा से साक्षात्कार कराती है। घने पेड़ों के बीच से गुजरती शुद्ध और ताज़गी भरी हवा पर्यटकों को एक गहन शांति का अनुभव कराती है। पहाड़ों के शांत वातावरण में चलते हुए मन स्वतः ही सकारात्मक ऊर्जा और असीम सुकून से भर उठता है।

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इस ट्रेकिंग मार्ग की एक बड़ी विशेषता यहाँ का स्थानीय आतिथ्य है। यात्रा के दौरान श्रीमती अनीता देवी और श्री सतीश प्रसाद जैसे स्थानीय नागरिकों के प्रतिष्ठान पर्यटकों को घर जैसा अनुभव प्रदान करते हैं। यहाँ मिलने वाली चाय और पहाड़ी नाश्ता न केवल थकान मिटाता है, बल्कि ‘अपनत्व’ का अहसास भी कराता है। ऐसे छोटे प्रयास स्थानीय लोगों को आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ अपनी आजीविका सुदृढ़ करने का एक सशक्त माध्यम प्रदान कर रहे हैं, जो सराहनीय है।
उत्तराखंड अपनी विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ऐसे कई ट्रेकिंग रूट्स के लिए प्रसिद्ध है। ये रास्ते न केवल साहसिक गतिविधियों के शौकीनों को आकर्षित करते हैं, बल्कि स्थानीय लोगों को भी अपनी जड़ों और प्रकृति से जुड़ने का अवसर देते हैं। झड़ीपानी का यह पुराना मार्ग ऐतिहासिक महत्व भी रखता है, जो आज के समय में ईको-टूरिज्म का बेहतरीन उदाहरण पेश कर रहा है। यहाँ की दिव्य शांति श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बार-बार आने के लिए प्रेरित करती है।
देवभूमि उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए यह मार्ग एक अनिवार्य अनुभव होना चाहिए। यहाँ की पवित्रता और प्राकृतिक सौंदर्य का लाभ उठाकर आप अपनी यात्रा को यादगार बना सकते हैं। प्रशासन भी अब इन छोटे ट्रेकिंग रूट्स को विकसित करने पर ध्यान दे रहा है ताकि स्थानीय पर्यटन को वैश्विक मानचित्र पर नई पहचान मिल सके। यदि आप भीड़भाड़ से दूर एकांत की तलाश में हैं, तो इस दिव्य भूमि का अनुभव अवश्य करें।

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