अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़
अल्मोड़ा में जनआंदोलनों के साथी राकेश रफीक का निधन, लोक वाहिनी ने दी श्रद्धांजलि
अल्मोड़ा में जनसंघर्षों के प्रमुख साथी राकेश रफीक के निधन पर उत्तराखंड लोक वाहिनी ने गहरा शोक व्यक्त किया। साझा रोटी आंदोलन में रही उनकी अहम भूमिका।
अल्मोड़ा। राज्य में जन आंदोलनों और सामाजिक संघर्षों में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाने वाले साथी राकेश रफीक का आकस्मिक निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से सामाजिक और राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई है। उत्तराखंड लोक वाहिनी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
उत्तराखंड लोक वाहिनी के प्रवक्ता दयाकृष्ण काण्डपाल ने दिवंगत नेता को याद करते हुए बताया कि राकेश रफीक ने आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता गोपाल राय, डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट और उत्तराखंड लोक वाहिनी के सहयोगियों के साथ मिलकर ‘तीसरा स्वाधीनता आंदोलन’ चलाया था। यही आंदोलन आगे चलकर आम आदमी पार्टी के गठन का मुख्य आधार बना। हालांकि, बाद के दिनों में राकेश रफीक पार्टी की कार्यप्रणाली से संतुष्ट नहीं रहे और जन सरोकारों से जुड़े रहे।
वाहिनी के महासचिव पूरन चन्द्र तिवारी ने बताया कि जनमत को एकजुट करने के उद्देश्य से राकेश रफीक ने दिल्ली में ऐतिहासिक ‘साझा रोटी आंदोलन’ की शुरुआत की थी। इस आंदोलन में डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट के नेतृत्व में उत्तराखंड लोक वाहिनी ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई थी। इसके साथ ही वे ‘तीसरे स्वाधीनता आंदोलन’ पत्रिका का संपादन भी सफलतापूर्वक करते रहे।
एडवोकेट जगत रौतेला और अजयमित्र ने कहा कि उनके प्रयासों से समाजवादी जन परिषद, आजादी बचाओ आंदोलन और लोक वाहिनी एक मंच पर आए। राकेश रफीक का इस तरह अचानक चले जाना समाज और जनआंदोलनों के लिए अपूरणीय क्षति है। श्रद्धांजलि देने वालों में बिशन दत्त जोशी, रेवती बिष्ट और मुहम्मद हारिस समेत कई लोग शामिल रहे।
