अल्मोड़ा/बागेश्वर/चंपावत/पिथौरागढ़
अलविदा कलावती तिवारी: उत्तराखंड आंदोलन की मजबूत रीढ़ और सादगी की प्रतिमूर्ति नहीं रहीं
उत्तराखंड लोक वाहिनी के वरिष्ठ नेता पूरन चंद्र तिवारी की धर्मपत्नी कलावती तिवारी का निधन। जानिए कैसे उन्होंने अपने त्याग और आत्मीयता से जनआंदोलनों को संबल दिया।
अल्मोड़ा। उत्तराखंड लोक वाहिनी के वरिष्ठ नेता और प्रसिद्ध आंदोलनकारी पूरन चंद्र तिवारी जी की धर्मपत्नी कलावती तिवारी जी के निधन की खबर से संपूर्ण सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है। 66 वर्ष की आयु में उन्होंने अल्मोड़ा स्थित अपने जाखनदेवी आवास पर अंतिम सांस ली। वे केवल एक वरिष्ठ नेता की जीवनसंगिनी ही नहीं थीं, बल्कि स्वयं त्याग, संघर्ष और असीम आत्मीयता की जीवंत प्रतिमूर्ति थीं।
जनआंदोलनों की वास्तविक ताकत केवल सड़कों के प्रदर्शनों तक सीमित नहीं होती। घर के भीतर से आंदोलन को संभालने वाली महिलाएँ ही उसकी असली नींव होती हैं। पूरन चंद्र तिवारी जी जब राज्य और समाज के अधिकारों के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहे थे, तब कलावती जी ने घर-परिवार और आते-जाते कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से संभाली।
अल्मोड़ा स्थित उनके आवास पर पहुँचने वाले हर साथी के प्रति उनका स्नेह अनुकरणीय था। देर रात पहुँचने पर भी उनके चेहरे पर कभी शिकन नहीं दिखती थी। पारंपरिक पहाड़ी आत्मीयता से हर आगंतुक का स्वागत करना और भोजन-पानी की चिंता करना उनके सहज स्वभाव का हिस्सा था। उनके आतिथ्य ने अनगिनत कार्यकर्ताओं को परिवार जैसा संबल प्रदान किया।
कलावती जी के चले जाने से अल्मोड़ा के उस ऐतिहासिक आँगन और उत्तराखंड के सामाजिक आंदोलनों की एक मजबूत रीढ़ टूट गई है। वे पूरन तिवारी जी के जीवन और संघर्षों की सबसे बड़ी हिम्मत थीं। उनके निधन पर उत्तराखंड लोक वाहिनी समेत विभिन्न संगठनों ने गहरा शोक प्रकट किया है। बागनाथ घाट बागेश्वर में उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
ईश्वर से प्रार्थना है कि वे दिव्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। साथ ही पूरन चंद्र तिवारी जी एवं शोकाकुल परिवार को यह अपार दुख सहने की शक्ति प्रदान करें।
